जी. बी. पंत के दिल्ली जाने के बाद डॉ. सम्पूर्णानन्द के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्रि पद जारी

१९५४

जी.बी. पंत का २७ दिसंबर १९५४ को केन्द्रीय गृहमंत्री के रूप में दिल्ली प्रस्थान। "पंत जी के केंद्र में जाने के बाद, चरण सिंह ने दोनों सम्बद्ध मंत्रालयों, साथ ही नीतियों को वांछित दिशा में लागु करने की इस्थिति पर से नियंत्रण खो दिया।" पॉल आर. ब्रास, 'एन. इंडियन पॉलिटिकल लाइफ', वॉल्यूम I , पृष्ठ १२५

२८ दिसंबर को डॉ. सम्पूर्णानन्द की सरकार में उन्हें राजस्व एवं परिवहन मंत्री नियुक्त किया गया, जहाँ वह ९ अप्रैल १९५७ तक रहे। ज़मींदारों को काश्तकारों से पुनः ज़मीन वापिस लेने की योजना आयोग की अनुशंसा को मानने से इंकार कर दिया, साथ ही कानूनन यह सुधर लागू किया कि कष्टकर के अधिकार में जो ज़मीं है, उसे वापिस नहीं लिया जा सकेगा।

हिन्दू समाज में जाति सोपान क्रम को ध्वस्त करने की दिशा में कदम उठाने के लिए राजपत्रित अधिकारियों के लिए अंतर्जातीय विवाह अनिवार्य करने हेतु पंडित नेहरू ( २२ मई) को लिखा।